रुड़की।  ( आयुष गुप्ता ) आईआईटी रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबन्धन विभाग द्वारा ‘हिमालय दिवस’ का आयोजन किया गया। इसके तहत हिमालय क्षेत्र के अंतर्गत शोध कर रहे विभाग के एम.टेक. व पी.एच.डी. विद्यार्थियों ने अपनी शोध उपलब्धियों से सम्बंधित प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. कृतिका कोठारी ने ‘हिमालय दिवस’ के आयोजन के बारे में विषय प्रस्तुत किया। प्रो. कोठारी ने बताया कि इण्डियन वाटर रिसोर्सेज सोसाइटी तथा जल संसाधन विकास एवं प्रबन्धन विभाग द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित उक्त कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जल के क्षेत्र में हिमालय के व्यापक महत्त्व से वाकिफ कराना है, जिससे मानव जनित कारकों से हिमालय क्षेत्र को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। प्रो. कोठारी ने कहा कि हिमालय के इसी महत्त्व को ध्यान में रखते हुए इसे ‘वाटर टावर ऑफ एशिया’ की उपाधि दी गई है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जल संसाधन विकास एवं प्रबन्धन विभागाध्यक्ष तथा भारतीय जल संसाधन समिति के उपाध्यक्ष प्रो. आशीष पाण्डेय ने बताया कि हिमालय ने देश के तकरीबन 20 करोड़ लोगों को प्रश्रय दिया हुआ है, जिसमें से लगभग 5 करोड़ लोग हिमालय क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि दिनों-दिन घटती जल उपलब्धता ने हिमालय क्षेत्र से हमारी उम्मीदों को और अधिक बढ़ा दिया है। नीति आयोग की वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए प्रो. पाण्डेय ने बताया कि 50 प्रतिशत जल धारियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे निपटना शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है। जल क्षेत्र में काम करने के नाते इन चुनौतियों से निपटने में हम सबकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। प्रो. आशीष पाण्डेय ने बताया कि यह अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है कि प्रसिद्द पर्यावरणविद पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी का विशेष मार्गदर्शन आईआईटी रुड़की को समय-समय पर प्राप्त होता रहता है। आज का आयोजन उसी श्रृंखला की एक कड़ी है, जिसके प्रेरणास्रोत डॉ. जोशी ही हैं। शोध छात्र गगनदीप सिंह ने अपनी प्रस्तुतीकरण में बताया कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचलों में आने वाली अचानक बाढ़ की घटनाओं में बढ़ोत्तरी को केन्द्रित रखते हुए हम अपना शोध कार्य कर रहे हैं, इसमें अचानक आई बाढ़ से होने वाले नुकसान तथा संवेदनशीलता मूल्यां्कन का कार्य शामिल है। उन्होंने अपने शोध में पाया कि हिमालय के हिंदुकुश क्षेत्र के निवासियों को अचानक आई बाढ़ जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ता है जिसके कारण लोगों को कभी कभी बहुत अधिक हानि उठानी पड़ती है। उन्होंने एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बताया कि 1980-2015 की अवधि के विश्लेषण के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि अचानक आई बाढ़ के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है, जो कि बहुत ही चिन्तनीय विषय है। शोध छात्र अंकित शर्मा व चाँदनी ठाकुर ने अपनी संयुक्त प्रस्तुति में ‘देव भूमि’ हिमाचल प्रदेश की संस्कृति से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि एक साथ सबसे अधिक लोगों द्वारा किये गए हिमाचल के प्रसिद्ध ‘नाती’ नृत्य के नाम गिनीज बुक में वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। दुनिया का सबसे ऊंचाई पर बना क्रिकेट स्टेडियम भी हिमाचल में मौजूद है। अभी हाल ही में हिमाचल प्रदेश भारत का पहला ‘धूम्रपान मुक्त राज्य’ घोषित किया गया है, जो देश के लिए गौरव का विषय है। शोध छात्रा नीनू ने ‘धरती का स्वर्ग उत्तराखण्ड- तथा सच्चिदानंद सिंह ने ‘हिमालय क्षेत्र में बाढ़ प्रबन्धन’ विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। नेपाल के छात्र सुजान कार्की व उनकी पूरी टीम ने अपने शोध कार्य के अलावा अन्त में नेपाली संस्कृति की झलक दिखाती एक मनमोहक वीडियो प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अन्त में प्रो. बसंत यादव ने सभी आगंतुकों व प्रतिभागियों का आभार ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में प्रमुख भूमिका का निर्वहन करने के लिए कार्यक्रम संयोजिका प्रो. कतिका कोठारी व सभी प्रस्तुतकर्ता छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा प्रिया सिंह ने किया।

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