रुड़की। ( आयुष गुप्ता ) वन विभाग देहरादून की टीम ने भगवानपुर क्षेत्र में छापेमारी करते हुए एक फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में तैयार तारपीन का तेल ओर बिरोजा बरामद किया है।
आज शुक्रवार को देहरादून वन विभाग की टीम भगवानपुर क्षेत्र के रुहालकी गांव में पहंुची, जहां टीम ने छापेमारी करते हुए एक फैक्ट्री से तैयार तारपीन का तोल और बिरोजा बरामद किया। वन विभाग की इस कार्रवाई से मौके पर हडकंप मच गया। बताया गया है कि चीड़ की लकड़ी से निकलने वाले लीसे से यहां तारपीन का तेल और बिरोजा तैयार किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में न तो मैनेजर मिला और न ही कंपनी का मालिक। टीम को मौके पर चार कर्मचारी मिले, जिनसे फैक्ट्री में मौजूद माल और उत्पादन से संबंधित लेखा-जोखा मांगा गया। लेकिन कोई भी कर्मचारी टीम को दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाये। इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर फैक्ट्री में तैयार माल को सील कर दिया। एसडीओ उदय गौड़ ने बताया कि मौके पर करीब 14,900 किलो तैयार तारपीन का तेल और 17,252 किलो बिरोजा मिला है। जिसका कोई पर कोई संतोषजनक लेखा-जोखा नहीं मिला। वन विभाग की टीम इस पहलू पर भी जांच में जुट गई है कि फैक्ट्री में चीड़ की लकड़ी कैसे आ रही थी? अब तक कितनी लकड़ी फैक्ट्री तक पहंुची ओर उससे कितना उत्पादन किया गया। विभाग का कहना है कि जांच में अगर निर्धारित मात्रा से अधिक या अनियमित माल पाया जाता है, तो कंपनी स्वामी और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। अहम सवाल यह भी है कि यह फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी। अगर कंपनी के पास वैध लाईसेसं है, तो स्टाॅक और उत्पादन का लेखा-जोखा मौके पर क्यों नहीं मिला। अब देखना यह होगा कि विभाग की जांच में क्या सामने आता है और अगर फैक्ट्री संचालन में कोई अनियमितता मिलती है, तो जिम्मेदारी किस पर तय होगी।
बहरहाल कुछ भी हो, देहरादून से आई वन विभाग की टीम ने स्थानीय वन विभाग की कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। भगवानपुर क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर चीड़ की लकड़ियों से तारपीन का तेल और बिरोजा निकाला जा रहा था, जिसकी भनक स्थानीय टीम को नहीं लग पाई या स्थानीय टीम लापरवाही बरत रही थी। बहरहाल पूरा मामला अब जांच के बाद ही खुल सकेगा।
देहरादून वन विभाग की टीम का रुहालकी (भगवानपुर) में छापा, भारी मात्रा में तारपीन का तेल व बिरोजा बरामद









