भगवानपुर/रुड़की।
प्रदेश में हाल ही में हरेला पर्व धूमधाम से मनाया गया, इस दौरान सरकार समेत सभी विभागों व सामाजिक संस्थाओं ने पौधारोपण के अभियान को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है की लकड़ी तस्कर विभागीय अधिकारियों से साठगांठ कर हरियाली को उजाड़ने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रहे।
ऐसा ही एक मामला भगवानपुर तहसील अंतर्गत भलस्वागाज गांव से बाल्लूपुर रोड का सामने आया, जहां पर वन विभाग की टीम ने एक बड़ा कारनामा कर दिखाया। रेंजर के निर्देश पर कार्यवाही करने गई टीम साठगांठ के चलते बेरंग लौट आई।

भगवानपुर के बाल्लुपुर से काटे गए पेडों की जड़ का चित्र

सूत्रों के अनुसार भलस्वागाज से बालुपुर जाने वाले मार्ग पर एक बड़ा बाग है, जिसको किसान द्वारा फल के समय ठेकेदार को दिया हुआ है। यहां पेड़ों की संख्या अधिक होने के चलते ठेकेदार ने सेटिंग गेटिंग करके बिना अनुमती के ही यहां से फलदार पेड़ों को धीरे धीरे काटना शुरु कर दिया। सूत्रों के अनुसार ठेकेदार एक वन दरोगा से सेटिंग गेटिंग करके उक्त फलदार पेड़ों को काट रहा है। अभी हाल ही में बीती 24 तारीख को भी कुछ फलदार पेड़ों पर आरी चलाई गई, लेकिन इस बार स्थानीय ग्रामीण ने वन रेंजर रुड़की को इन पेड़ों के कटान की सूचना दी। जिस पर वन रेंजर विनय राठी ने चार सदस्यीय टीम को जांच के लिए मौके पर भेजा। सूत्रों के अनुसार जब टीम मौके पर पहुंची, तो उक्त पेड़ों को काटकर ठेकेदार दो ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर ठिकाने लगाने की जुगत में था। तभी टीम ने आरोपी ठेकेदार को दबोच लिया, इसके बाद टीम ने दोनो ट्रैक्टर ट्रॉली को अपने कब्जे में ले लिया और ड्राइवर को चौकी चलने को कहा। भलस्वागाज से लेकर मानकपुर आदमपुर तक टीम तथा ट्रैक्टर ट्राली पहुंच चुके थे, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार द्वारा किसी रसूखदार के माध्यम से उक्त टीम के सदस्यों को एक मोटी रकम देकर मामले को रफा दफा करने पर राजी कर लिया गया और टीम द्वारा वन रेंजर को मौके पर कुछ भी नही मिलना बताया गया। लेकिन मौके के कुछ फोटो इसका प्रमाण है कि फलदार वृक्ष कटे है या नही कटे है। इस मामले की जानकारी डीएफओ वैभव सिंह को दी गई। जिनके द्वारा मामले का संज्ञान लेकर कार्यवाही करने की बात कही गई। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या भ्रष्टाचार का ये खेल यूं ही चलता रहेगा या डीएफओ वैभव सिंह द्वारा कोई ठोस कदम उठाकर इन भ्रष्ट अधिकारियों/ कर्मचारियों को सबक सिखाने का काम किया जायेगा। जिससे आगे किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलत करने की हिम्मत ना हो सके। सूत्रों के अनुसार विभाग द्वारा ठेकेदार पर दबाव बनाया जा रहा है कि मुखबरी करने वाले का नाम पता करें।

सलेमपुर से काटे गए पेड़ की जड़ का चित्र

वहीं दूसरी ओर सलेमपुर स्थित एक इंडस्ट्री के पास से भी एक दर्जन के करीब आम के फलदार पेड़ों का कटान कर दिया गया, जिसके बाद लकड़ी तस्करों द्वारा उक्त खेत को पाट भी दिया गया।
बताया गया है कि रात्रि के समय चोरी -छिपे आम के हरे पेड़ों का कटान जोरशोर से किया जा रहा है। लेकिन कारवाई के नाम पर उद्यान हो या वन विभाग, दोनों के ही हाथ खाली है। हैरत की बात है कि आम के पेड़ों का कटान होने के मामले लगातार सामने आ रहे है, क्या रेंज का स्टाफ स्वयं ही खानापूर्ति करने में लगा है, यदि ऐसा है तो फिर रेंजर द्वारा स्टाफ को छूट दिया जाना भी सवालों के घेरे में है। हालांकि विभाग ने अभी पेड़ो की संख्या की पुष्टि नहीं की है, जबकि कारवाई को लेकर रेंजर ने सिर्फ आश्वासन ही दिया।

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