संघ विचारधारा को समझना है, तो डॉ. हेडगेवार के जीवन को जाने, प्रशिक्षण शिविर में बोले डॉ. शेलेन्द्र

रुड़की। ( आयुष गुप्ता )
आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित आठ दिवसीय प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केन्द्र रुड़की में चल रहे प्रान्तीय प्रथम सहयोगी आचार्य प्रशिक्षण वर्ग कार्यशाला के 5वें दिन का शुभारम्भ डॉ. शेलेन्द्र (प्रान्त प्रचारक उत्तराखण्ड), डॉ. विजयपाल सिंह (प्रदेश निरीक्षक भारतीय शिक्षा समिति, उत्तराखण्ड़) नत्थीलाल बंगवाल (सम्भाग निरीक्षक, गढ़वाल सम्भाग), सुरेशानंद जोशी (सम्भाग निरीक्षक, कुमाऊँ सम्भाग) एवं अमरदीप सिंह (प्रधानाचार्य, प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख) एवं प्रशिक्षण टोली प्रमुख मनोज रयाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि संघ विचार को समझना है, तो संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवन परिचय को समझना आवश्यक है, डॉ. हेडगेवार द्वारा आदर्श स्वयंसेवक की भूमिका का निर्वहन करते हुये संघ कार्य प्रारम्भ किया। डॉ. साहब का परिवार अत्यन्त सामान्य परिवार था, उस विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्र सेवा के कार्य में लगना उनके राष्ट्रभक्ति के गुणों को प्रदर्शित करता है। बाल्यकाल से ही निर्भीक होकर नेतृत्वकारी कार्य करते हुये समाज को संगठित करने के कार्य में लगे। जिस हिन्दू समाज को संगठित करना असम्भव सा था तथा अभावग्रस्त होने के बाद भी सम्भव कर दिखाया। उन्होने मान-अपमान प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर कार्य करने की पराकाष्ठा को अपने व्यवहार एवं आचरण से पूर्ण किया। आज संघ सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि आदि विशेष क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। भावराव देवरस संस्थान द्वार माधव सेवा केन्द्र आज सम्पूर्ण देश के 06 स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। दैवीय आपदा में पीडित सहायता समिति के नाम से अनेक प्रकल्प चल रहे है। विद्या भारती उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे है। आज संघ समाज जीवन के हर क्षेत्र में कार्य कर रहा है। समाज भी सहयोग कर रहा है। बस हमें अपने कर्म संस्कृति के अनुरुप अपना आचरण व्यवहार करना है। संघ का अब विराट स्वरुप है, हम सभी उस विराट स्वरूप के अंग है। हम सभी संघ कार्य के वाहक है। संघ कार्य का विस्तार करना, प्रत्येक ग्राम बस्ती में संघ कार्य को पहुँचना, यह हम सभी का शताब्दी वर्ष में लक्ष्य रहना चाहिए। डॉ. हेडगेवार द्वारा अपने शरीर को तिल-तिल जलाकर संघ कार्य को देशभर में स्थापित करने का काम किया। संघ की स्थापना काल में अविश्वास का वातावारण था, धीरे-धीरे संघ कार्य बढने लगा तब उपेक्षा, तिरस्कार, प्रतिबन्ध आदि सब संघ पर लगाये गये, लेकिन संघ इन सभी झंझावतों से निकल कर आज सम्पूर्ण देश व्यापी है। आज विद्या भारती के 550 विद्यालय उत्तराखण्ड में चल रहे है।

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